गवना करवला ए हरी जी लिरिक्स- भरत शर्मा व्यास

गवना करवला ए हरी जी लिरिक्स- भरत शर्मा व्यास

     गवना करवला ए हरी जी राजा पिय जनी गांजा लिरिक्स- भरत शर्मा व्यास

आआ…..आआ….. आ.. आ……
दोहा – टिसीरिज एशियाई कम्पनी, टिसीरिज एशियाई कम्पनी, टिसिरिज एशियाई कम्पनी के बा चारो ओर हाल्ला
भारत देश के हर एक प्रांत में ए कंपनी के झंडा फहराला

गवना करवला ए हरी जी अरे गवना करावला ए हरी जी अपने पुरूबवा गईला ए राम
अपने पुरुबवा गइला ए राम

गवना करावला ए हरी जी गवना करावला          ए हरी जी अपने बिदेशवा गईला ए राम

जब जब याद आवे तोहरी सूरतिया
काटला से कटे ना इ बिरहा के रतिया
जिया छछनावला ए हरी जी
जिया छछनावला ए हरी जी
अपने बिदेशवा गईला ए राम

आआ….. आ….आआ……..
कवनो संदेसवा ना पतिया पेठवला
मोर बिरहिनिया के बड़ा तरसवला
रोवां डहकवला ए हरी जी
रोवां डहकवला ए हरी जी
अपने पुरूबावा गईला ए राम

आआ…….…आआ….. ओ….. ओ
रोवां डहकवला ए हरी जी
रोवां डहकवला ए हरी जी
अपने बिदेशवा गईला ए राम

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