जनती जे जारल जईबू आग में दहेज के लिरिक्स- भरत शर्मा व्यास

जनती जे जारल जईबू आग में दहेज के लिरिक्स- भरत शर्मा व्यास

जनती जे जारल जईबू आग में दहेज के लिरिक्स- भरत शर्मा व्यास               1. कंची कली की इस दामन छुपाकर फूलों तले  सांस पाती है बेटी, खिल जाती कलियां तो डाली से झुककर आंचल में मुखड़ा छुपाती है बेटी, खुशबू छिड़कती है सेवा से अपने मर्यादा कुल की बढ़ाती है … Read more

पिया मोरा लेके अइले लिरिक्स – मदन राय निर्गुण

पिया मोरा लेके अइले लिरिक्स - मदन राय निर्गुण

पिया मोरा लेके अइले लिरिक्स – मदन राय निर्गुण     लाली लाली डोलिया हो हमरी दुअरिया पिया मोरा लेके अइले की पिया मोरा लेके आइले संगवा में चारिगो कन्हार पिया मोरा लेके अइले संगवा में चारगो कहार पिया मोरा लेके आइले लाली लाली डोलिया हो हमरी दुअरिया पिया मोरा लेके अइले संगवा में चारिगो … Read more

चुनरिया में दाग लग गईल लिरिक्स- मदन राय निर्गुण

चुनरिया में दाग लग गईल लिरिक्स- मदन राय निर्गुण   बइठल रोवेली गुजरिया हो चुनरिया में दाग लग गईल । बइठल रोवेली गुजरिया हो चुनरिया में दाग लग गईल । कइसे जाईं पिया के नगरिया हो कइसे जाईं पिया के नगरिया हो चुनरियां में दाग लग गईल ॥ बइठल रोवेली गुजरिया हो चुन्दरिया में दाग लग गईल आईल बा गवना क हमरो सनेसवा जाएके बा हमरा के पियवा के देशवा । काँच बारी, कांच बारी हमरी उमिरिया हो चुनरियां में दाग लग गईल । कांच बारी हमरी उमिरिया हो चुनरियां में दाग … Read more

छोड़ गइले रेे रात सुतले सेजरिया पे लिरिक्स-भरत शर्मा

13.छोड़ गइले रेे रात सुतले सेजरिया -भरत शर्मा के लोकगीत   आ आआ..आआ… छोड़ गइले रेे रात सुतले सेजरिया पे छोड़ी गइले रेे रात सुतले सेजरिया पे छोड़ गइईले.. चढ़ली जवनिया कदम बहकावे अंखिया के निंदिया अंखियां के निंदिया 2 अखियां के निंदिया रैन तरसावे कांचे कली उ  कांचे कली उ मड़ोड गइल रे रात … Read more

तुहिं हमरा जीनगी के सोलहो सिंगार lyrics-भरत शर्मा व्यास

1.तुहिं हमरा जीनगी के सोलहो सिंगार lyrics-भरत शर्मा व्यास तुहिं हमरा जीनगी के सोलहो सिंगार                                        तनी हेने आव तनी हेने आव तोहरे पर आसरा हमार तनी हेने आव                  … Read more

एक त मा बारी भोरी लिरिक्स-मदन राय निर्गुण

1. एक त मा बारी भोरी दूसरे पियावा गइलन रे चोरी – दोहा- की नागन बैठी राह में, बिरहन पहुंची आय नागन डर गई आप के, कि बिरहन डंस न जाय नाहर के नख में बसे, दन्ते बसे भुजंग की बिच्छी के पोछी बसे, बिरहन के सब अंग एक त मा बारी भोरी दूसरे पियावा … Read more